दिल्ली :
हम निकल पड़े हैं प्रण करके,
अपना तनतन अर्पण करके,
जिद है एक सूर्य उगाना है,
अम्बर से ऊचा जाना है,
एक भारत नया बनाना है,
एक भारत नया बनाना है।
(अटल बिहारी बाजपेयी )
ऊपर के चंद लाईन हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के द्वारा रचित हमारी इक्यावन कविताएँ से ली गई है।
अटल जी भारत का पहला गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जो अपना कार्यकाल 5 बरस पुरा किया ।अटल जी ही ऐसा प्रधानमंत्री थे जो अमेरिका जैसे (व्यापारी देश कहें या कूटनीतिमें कुशल) देश को आँख दिखाने का काम किया।अटल जी हमारे देश के उन रत्नों मे से है जो अकबर के दरबार में नहीं था। अटल बिहारी वाजपेयी ऐसा प्रधानमंत्री थे जो कारगिल जैसे युध्द को जितने का गौरव प्राप्त किये। अटल जी एक सफल नेता होने के साथ-साथ एक सफल कवि भी थे। अटल जी हिन्दी बोलने के धनी व्यक्ति थे।
उत्तरप्रदेश के आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर में पण्डित कृष्ण बिहारी बाजपेयी के यहाँ जन्मे अटल जी बचपन से ही अटल प्रवृति के थे।अपने बाल अवस्था में ही महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित अमर कृति "विजय पताका" पढ़ लिया था। अटल जी को काव्य का गुण वंशानुगत प्राप्त हुआ था। अपने छात्र जीवन से ही अटल जी राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुर गए थे। उन्होने बी. ए. की पढ़ाई ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अभी का लक्ष्मीबाई कॉलेज) से पुरा किया। कानपुर के डी ए वी कॉलेज से राजनीति शास्त्र से एम.ए.की पढ़ाई प्रथम श्रेणी से ऊतृण हुआ। बाद में कुछ दिनो बाद L.L.B. में दाखिला लिया लेकिन ये पुरा नही हो सका । अब अटल जी संघ के लिये समर्पित हो गये । उसके बाद डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के सानिध्य में राजनीत की पाठ पढा साथ-साथ पांचजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जून जैसे पत्र पत्रिकाओं से सम्पादन का भी अनुभव लिया। सर्वतोँमुखी विकास में किये गये योगदान और असाधारण कार्यों के लिये दिसंबर 2004 को अटल जी को भारतरत्न से नवाजा गया।
अटल जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों मे से थे ।उन्होने 1968 में जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किये। 1958 में अटल जी पहली बार उत्तरप्रदेश के गोंडा के बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चून कर संसद भवन में आये। 1958 से 1977 तक जनसंघ के सदस्य रहे। 1977 में इन्दिरा गाँधी सरकार के द्वारा आपातकाल लगाये जाने के बाद अपने भौत से साथी यानी उस समय के विपक्ष के नेताओं के साथ अटल जी को भी गिरफ्तार किया गया। आपातकाल के बाद अटल जी की पार्टी सरकार में आयी । मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री और अटल जी को विदेश मंत्री नियुक्त किया गया। मोरारजी देसाई के सरकार में विदेश मन्त्री रह कर देश का नाम रौशन किये। विदेश मंत्री रहते हुए पहला ऐसा हिंदुस्तानी नेता बने जो यूनाइटेड नेशनेशंस के अस्सेंब्ल्ली में हिन्दी में भाषण दिये। 1980 में जनता पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी बनाने में लालकृष्ण आडवाणी का मदद किया। 3 अप्रैल 1980 को बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रूप में अटल जी को कार्यभार मिला। उसके बाद अटल जी 2 बार राज्यसभा के सदस्य भी चुने गए। 1984 में हुए सिख दंगा के लिये अटल जी ने इन्दिरा गाँधी को कुसूरवार ठहराया और उसका विरोध किया।।1984 के लोक सभा चुनाव में अटल जी की पार्टी मात्र 2 सीट जीत पायी जिसमे से एक सीट अटल जी का भी था।
राम जनम भूमि अन्दोलन को लेके बीजेपी की जमीन ही बदल गई। इस अन्दोलन के बाद अटल जी का सितारा चमका साथ ही साथ आडवाणी जी का भी। राम जनम भूमि आँदोलन इंडिया का सबसे विवादित आन्तरिक मामलों मे से एक है। 1995 में विधनसभा चुनाव होता है और बीजेपी की निकल पड़ी। महाराष्ट्र और गुजरात में बीजेपी की सरकार बन गई।1994 में कर्नाटक के चुनाव में भी बढिया परिणाम देखने को मिला।
अब बारी थी अटल जी को प्रधानमंत्री पद के लिये उमीदवार घोषित करना।वो भी हो गया 1995 के बीजेपी के राष्ट्रीय सम्मेलन में । उसके बाद बीजेपी 1996 के चुनाव को हस्ते हस्ते जीत लिया। 1996 के चुनाव में बीजेपी एकलौता सबसे बड़ी पार्टी में के उभरा। उस समय के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया जिसे अटल जी पार्टी ने सहर्ष स्वीकार किया। अटल बिहारी बाजपेयी भारत के 10वें प्रधान-मंत्री के रूप में सपथ लिया । बीजेपी को पुर्ण बहुमत के कमी होने के कारण मात्र 13 दिन का प्रधानमंत्री बन पाया अटल जी। 1996 और 1998 में दो गठबंधन वाली सरकार गिरने के बाद लोक सभा को भंग कर दिया गया ।1998 में फ्रेश चुनाव कराने का निर्णय लिया गया । 1998 के चुनाव में भी बीजेपी सबसे बारी पार्टी बनकर उभरे । इस कुछ छोटी पार्टी मिलकर बीजेपी को गठबंधन की सरकार बनाने मे मदद किया जिसे NDA नाम दिया गया। एक बार 1998 में अटल जी को भारत के प्रधानमंत्री बनाया गया। इस बार भी अटल जी की सरकार मात्र 13 महीना ही टिक पाया।क्योंकि AIADMK के नेता जयललिता ने अपना सहयोग NDA से हटा लिया। बीजेपी की सरकार एक बार फिर 17 अप्रैल 1999 को एक वोट से अल्पमत में आ गया, चूकि किसी भी पार्टी के पास सरकार बनाने के लिये आवश्यक बहुमत नही था तो एक बार फिर से लोक सभा को भंग कर दिया गया और फिर से चुनाव कराया गया। जबतक एक बार फिर से चुनाव न हो जाये तब तक बाजपेयी जी प्रधानमंत्री बने रहे।
1999 के आम चुनाव में बीजेपी 543 में से 303 सीट जीत कर आये। अटल जी 13 अक्टूबर 1999 को एक बार फिर से प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार देश के सत्ता पर काबिज हुए और 2004 तक अपने कार्यकाल को पुरा किये।
परमाणु परीक्षण
मई 1998 को ( अटल जी प्रधान-मंत्री बनने के एक महीने बाद) पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण पोखरण में किया गया ।इस परीक्षण को पोखरण 2 का नाम दिया गया। पहला परीक्षण 1974 में किया गया था जिसे लाफिंग बुद्ध नाम दिया गया था।
लाहौर समझौता
1998 के अन्त में और 1999 के शुरुआत में अटल जी पकिस्तान के साथ रिश्ता सुधारने का असफल कोशिस किये ।फ़रवरी 1999 में न्यू दिल्ली से लाहौर के बीच ऐतिहासिक बस सेवा शुरु करवाया।
कारगिल युध्द
कुछ ही समय पश्चात् पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतर्राष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया। इस युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण भारतीय सेना को जान माल का काफी नुकसान हुआ और पाकिस्तान के साथ शुरु किए गए संबंध सुधार एकबार फिर शून्य हो गए।
अटल जी सरकार की कुछ मुख्य कार्य
1.भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (अंगरेजी में- गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजैक्ट या संक्षेप में जी क्यू प्रोजैक्ट) की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया। ऐसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ था।
2.एक सौ साल से भी ज्यादा पुराना कावेरी जल विवाद को सुलझाया।
3.संरचनात्मक ढाचे के लिए कार्यदल, प्रौद्योगिकी विकास के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी कार्यदल, संचालन में गतिशील के लिए केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया गया।
4.राष्ट्रीय राजमार्गों और हवाई अड्डों का विकास
5.नई टेलीकॉम नीति और कोकण रेलवे की चुनौती संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने के लिए कदम उठाएं।
6.राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार और उद्योग समिति भी गठित कीं।
7.आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतें नियन्त्रित करने के लिए मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन बुलाया।
8.उड़ीसा के सुरक्षित गरीब क्षेत्र के लिए सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया।9.आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया।
10.ग्रामीण रोजगार सृजन और विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए बीमा योजना शुरू की।
11.सरकारी खर्चे पर रोजा इफ्तार शुरू किया।
by:👉👉👉
by:👉👉👉
विवेकानंद कुमार

ConversionConversion EmoticonEmoticon